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झीरम घाटी हत्याकांड में आज NIA कोर्ट का फैसला: 13 साल बाद न्याय की घड़ी; 294 सुनवाई, 101 गवाहों के बयान, देश की नजर

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े और चर्चित राजनीतिक हत्याकांडों में शामिल झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में आज यानी 31 अगस्त को बड़ा फैसला आ सकता है। करीब 13 साल से चल रहे इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने अंतिम बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। अब अदालत के निर्णय पर पीड़ित परिवारों के साथ पूरे छत्तीसगढ़ और देश की नजरें टिकी हैं।

मामला 25 मई 2013 का है, जब कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर बस्तर की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई नेता, कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में गिना जाता है।

13 साल में 294 बार हुई सुनवाई

झीरम घाटी मामले की न्यायिक प्रक्रिया बेहद लंबी रही। The Indian Express के मुताबिक, मामले में करीब 294 सुनवाई हुईं। अंतिम चरण में अभियोजन और बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।

वहीं, Patrika की रिपोर्ट के अनुसार सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। मामले में कुल 41 लोगों को आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि वर्तमान में 10 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है।

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NIA ने दो दिन बाद संभाली थी जांच

हमले के बाद शुरुआती जांच छत्तीसगढ़ पुलिस ने की थी। घटना के दो दिन बाद NIA ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली। NIA ने सितंबर 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद सितंबर 2015 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की गई।

मामले की सुनवाई जगदलपुर की NIA विशेष अदालत में आगे बढ़ती रही। वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अब यह मामला फैसले के अंतिम पड़ाव पर पहुंचा है।

क्या था झीरम घाटी हमला?

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर की ओर लौट रही थी। इसी दौरान दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने काफिले को घेर लिया।

पहले रास्ते में विस्फोट किया गया और इसके बाद माओवादियों ने काफिले पर गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए। नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कई लोगों की जान गई।

हमले के बाद से उठता रहा बड़ी साजिश का सवाल

झीरम घाटी हमले के बाद से ही इस बात पर बहस होती रही है कि क्या यह केवल माओवादी हमला था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी थी।

कांग्रेस की ओर से समय-समय पर आरोप लगाया गया कि हमले की बड़ी साजिश की पूरी जांच नहीं हुई। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने भी मामले को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच NIA की जांच और अदालत में चली सुनवाई पर सबकी निगाहें बनी रहीं।

SIT जांच को लेकर भी रहा विवाद

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के बाद 2018 में झीरम घाटी मामले में एक SIT गठित की गई थी। 2020 में दरभा थाने में हत्या और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं में एक अलग FIR दर्ज की गई।

इस जांच को लेकर NIA और राज्य पुलिस के बीच कानूनी विवाद भी हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में राज्य पुलिस की FIR की जांच को लेकर NIA की याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

फैसले से पहले सिंहदेव ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

फैसले से ठीक पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने घटना के दिन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वे झीरम हमले के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं और उन्होंने NIA के सामने अपना बयान दर्ज कराया है।

सिंहदेव के अनुसार, घटना वाले दिन झीरम घाटी क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि घटना की जिम्मेदारी तय होने पर ही पीड़ित परिवारों को वास्तविक न्याय मिलने का संतोष होगा।

आज क्या तय होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि NIA की विशेष अदालत मामले में आरोपियों को लेकर क्या फैसला सुनाती है और क्या 13 साल पुराने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्णायक पड़ाव तक पहुंचती है।

फैसला आने के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों तथा 101 गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों को किस तरह देखा।

13 साल के इंतजार के बाद आज झीरम घाटी मामले में फैसला आने की उम्मीद है। पीड़ित परिवारों से लेकर राजनीतिक दलों और आम लोगों तक, सभी की निगाहें जगदलपुर की NIA विशेष अदालत पर टिकी हैं।

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रुपेश चन्द्रवंशी

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लेखक/संपादक BJMC (Bachelor of Journalism & Mass Communication) डिग्रीधारी एवं 12 वर्षों से अधिक के मीडिया अनुभव के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और वेब मीडिया में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है।

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